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  • हिमाचल प्रदेश ने भूटान को भेंट किए चिलगोजा के पौधे
  • राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लोहड़ी व मकर संक्रांति की बधाई दी
  • चिट्टा गतिविधियों में शामिल 11 पुलिस कर्मी नौकरी से बर्खास्त
  • प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व मंत्री से भेंट की
  • राजस्व मंत्री ने जल विद्युुत परियोजनाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की
  • मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की
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  • मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की
    बांधों और जलाशयों के वाष्पीकरण और ग्लेशियर पिघलने पर वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश दिए
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विभागों और उपक्रमों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
    मुख्यमंत्री ने विभिन्न बांधों और जलाशयों से गर्मियों के मौसम में पानी के वाष्पीकरण का विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में बढ़ता धंुध का स्तर चिंता का विषय है। इस सम्बन्ध में वैज्ञानिक अध्ययन करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि इस विषय का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए, बांधों से पानी के वाष्पीकरण का क्या बादल फटने की घटनाओं से सम्बन्ध है या नहीं?
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में ग्लेशियरों के पिघलने की दर तथा बाढ़ प्रबन्धन का अध्ययन करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरांे का पिघलना पारिस्थितिक तंत्र पर विपरीत प्रभाव डालता है तथा इससे प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित होता है।
    मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की तथा अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट मीटर पर विस्तृत चर्चा की तथा फीडर बिलिंग की मैपिंग करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि 13 जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा होने से राज्य में ऊर्जा दोहन में 1229 मेगावाट क्षमता की वृद्धि हुई है।  
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • चिट्टा गतिविधियों में शामिल 11 पुलिस कर्मी नौकरी से बर्खास्त
    हिमाचल प्रदेश सरकार ने चिट्टे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए आज 11 पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इन कर्मचारियों के खिलाफ यह कार्रवाई प्रदेश सरकार की चिट्टा और नशे के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति के अनुरूप, एनडीपीएस एक्ट के मामलों में संलिप्त पाये जाने पर की गई है। यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत की गई है। यह कार्रवाई स्पष्ट और कठोर संदेश है कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस बल में कानून तोड़ने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। 
     एनडीपीएस एक्ट के मामलों में संलिप्त 1-भारतीय रिजर्व बटालियन बनगढ़ में तैनात इंस्पेक्टर नीरज कुमार, जिला बिलासपुर में तैनात पुलिस कांस्टेबल शुभम ठाकुर, 3- भारतीय रिजर्व बटालियन पंडोह में तैनात कांस्टेबल कपिल, एसडीआरएफ में तैनात कांस्टेबल शिव कुमार, जिला शिमला पुलिस में तैनात कांस्टेबल लक्ष्य चौहान, एसवी एंड एसीबी में तैनात कांस्टेबल/ड्राइवर विशाल ठाकुर, 4-भारतीय रिजर्व बटालियन जंगलबैरी में तैनात कांस्टेबल गौरव वर्मा, 2-भारतीय रिजर्व बटालियन सकोह में तैनात कांस्टेबल/ड्राईवर संदीप राणा, एसडीआरएफ में तैनात कांस्टेबल अंकुश कुमार, स्टेट सीआईडी में तैनात कांस्टेबल रजत चंदेल तथा जिला शिमला में तैनात कांस्टेबल राहुल वर्मा को सेवा से बर्खास्त किया गया है।
    आज शिमला में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी चिट्टे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की है। अगर पुलिस कर्मी ही चिट्टा गतिविधियों में शामिल होंगे तो इस तरह की सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। चिट्टा तस्करी व अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को  बख्शा नहीं जाएगा। चिट्टा गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
    पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने पुलिस विभाग द्वारा चिट्टा के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी।
    मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि चिट्टे की तस्करी और चिट्टा गतिविधियों में शामिल सभी कर्मचारियांे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर इसकी सूचना मुख्य सचिव को शीघ्र प्रदान की जाए। उन्होंने कर्मचारियों द्वारा चिट्टे से कमाई गई सम्पत्ति की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए।
    उन्होंने कहा कि दो ग्राम तक के चिट्टे की सूचना के लिए 10 हजार रुपये, पांच ग्राम के लिए 25 हजार रुपये, 25 ग्राम के लिए 50 हजार रुपये, एक किलो के लिए पांच लाख रुपये तथा एक किलो से अधिक मात्रा में चिट्टे की सूचना देने के लिए 10 लाख रुपये ईनाम राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बड़े गिरोह के सूचना देने वाले को पांच लाख रुपये से अधिक की ईनाम राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि चिट्टे से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 112 आपातकालीन नंबर शुरू किया गया है। उन्होंने लोगों से इस संबंध में किसी भी जानकारी को साझा करने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करने का आह्वान किया। 
    बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु, महाधिवक्ता अनूप रतन, निदेशक ग्रामीण विकास राघव शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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  • हिमाचल प्रदेश ने भूटान को भेंट किए चिलगोजा के पौधे
    मुख्यमंत्री ने वाहन को हरी झंडी दिखा किया रवाना
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश सचिवालय शिमला से भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंधों को और सुदृढ़ करते हुए भूटान को चिलगोजा के पौधों का उपहार प्रेषित किया।  
     वाहन को हरी झंडी दिखाने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल भारत और भूटान के मैत्रिपूर्ण, सौहार्द व भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा भूटान को पांच लाख रूपये मूल्य के चिलगोजा के और बीज भी प्रदान किये जाएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा भूटान के वन विभाग के अधिकारियों को चिलगोजा के पौधे उगाने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसके लिए उनके वन विभाग की टीम शीघ्र ही हिमाचल आएगी। प्रदेश सरकार चिलगोजा गतिविधियों में स्थानीय  महिला मंडलों को भी शामिल करेगी और इसके लिए उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पूर्व भी भूटान को चिलगोजा के 50 किलोग्राम बीज प्रदान किए जा चुके हैैंं। 
    चिलगोजा पश्चिमी हिमालय की बहुमूल्य प्रजाति है, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता और स्थानीय आजीविका से गहराई से जुड़ी हुई है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार वन संवर्धन के लिए अनेक पहल कर रही है और राज्य में वन आवरण के विस्तार को लेकर अनेक योजनाएं चला रही है। सरकार के प्रयासों से वन क्षेत्र लगभग 55 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। इस वर्ष लगभग 9,000 हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के अंतर्गत पौधरोपण किया जा रहा है, इसमें 60 प्रतिशत फलदार पौधे शामिल हैं।
    मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना बंजर पहाड़ियों को हरा भरा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 600 हेक्टेयर बंजर पहाड़ियों पर पौधरोपण किया गया है।
    वनों की रक्षा एवं प्रबन्धन के लिए 2019 वन मित्र की नियुक्ति की गई है, जिन्हें वृक्षारोपण, अग्नि सुरक्षा, राल दोहन सहित विभिन्न वानिकी कार्यों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
    प्रदेश सरकार जन सहयोग से हरित आवरण में बढ़ोतरी के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके दृष्टिगत राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, ग्रीन एडॉप्शन योजना सहित अनेक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
     इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, उपाध्यक्ष हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम केहर सिंह खाची, विधायक कैप्टन रणजीत सिंह राणा एवं मलेन्द्र राजन, प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष दिलदार अली भट्ट, महाधिवक्ता अनूप रतन, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल संजय सूद तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री से नादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़ा और फस्टे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट
    मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां नादौन विधानसभा क्षेत्र की बड़ा और फस्टे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। 
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नादौन विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के बारे में चर्चा की तथा फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि बड़ा पंचायत में स्थापित होने वाले स्पाइस पार्क का शिलान्यास शीघ्र ही किया जाएगा। 
    मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नादौन क्षेत्र मंे प्राकृतिक खेती से हल्दी उगाने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं के दाम 60 रुपये प्रतिकिलो,  निर्धारित किए हैं और 15 अप्रैल, 2025 को पांगी उपमंडल को पूर्णतः प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा कच्ची हल्दी पर 90 रुपये और पांगी घाटी में उगाए गए जौ पर 60 रुपये प्रतिकिलो का समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भारत का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती द्वारा उगाए गए उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। 
    मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने का आग्रह किया ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकंे। 
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  • मुख्यमंत्री ने पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत दिए दिशा-निर्देश
    कहा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमों की सख्ती से अनुपालना की जाए 
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नगर निगम शिमला को शहर में पर्यटकों की सुविधा और स्वच्छता व्यवस्था के दृष्टिगत विभिन्न निर्देश जारी किए हैं। शनिवार देर सायं मालरोड़ शिमला और अन्य स्थलों का दौरा करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभिन्न वेंडर खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं के निर्धारित मूल्यों से अधिक दाम न वसूले।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवता, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय और खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मापदंडों की सख्ती से अनुपालना की जाए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कचरे का सुरक्षित और उचित तरीके से निपटान करने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति से भी उसकी छवि का आकलन किया जाता है। शिमला आने वाले पर्यटकों को यात्रा का बेहतरीन अनुभव प्राप्त होना चाहिए, साथ ही स्थानीय निवासियों की सुविधा का ध्यान रखना भी नितांत आवश्यक है। 
    उन्होंने  कहा कि प्रदेश सरकार शहरी क्षेत्रों में जन सेवाओं में और सुधार के साथ-साथ उन्हें सुलभ भी बना रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ शहर, समृद्ध शहर’ के तहत सिटीजन कनेक्ट प्रोग्राम के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और नागरिकों की उभरती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार शहरी विकास की नई समावेशी और टिकाऊ दिशा निर्धारित कर रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने छोटे दुकानदारों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ऐसे दुकानदारों, जिन पर एक लाख रुपये तक का ऋण बक़ाया है और जिन्हें बैंकों द्वारा गै़र-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित किया गया है, उन्हें एक लाख रुपये तक की एकमुश्त भुगतान सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार जिन दुकानदारों पर एक लाख से दो लाख रुपये तक का बकाया ऋण है उन्हें भी एक लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नागरिक सेवा मंच के माध्यम से शहरी जन सेवाओं को और सुलभ बनाया गया है। पहले चरण में नौ ऑनलाइन सेवाएं प्रारंभ की गई, जिनमें 2.5 लाख से अधिक नागरिकों ने पंजीकरण किया है। दूसरे चरण में भी नौ नई सेवाओं को शामिल किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार तथा जनता के बीच दूरी कम होगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल डोर प्लेट के माध्यम से प्रत्येक शहरी घर को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जा रही है, जो शहरी शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया अध्याय सिद्ध होगी। 
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  • मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए दिए निर्देश
    ऊर्जा खपत का 90 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से दोहन का लक्ष्य
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न स्वास्थ्य संस्थान भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी भवनों में चरणबद्ध तरीके से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और धन की बचत भी होगी।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य को हरित ऊर्जा राज्य के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। 
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्रतिवर्ष ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है। राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि इस ऊर्जा खपत का 90 प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के दोहन से पूरा किया जाए।
    राज्य सरकार द्वारा दो वर्षों के भीतर प्रदेश में 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 32 मेगावाट की पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना, पांच मेगावाट की भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना और 10 मेगावाट की अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना विद्युत उत्पादन कर रही हैं। राज्य सरकार सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कम्प्रैस्ड बायोगैस और अन्य क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की दिशा में विशेष रूप से प्रयास कर रही है। 
    राज्य सरकार द्वारा हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के दृष्टिगत ग्राम पंचायतों को केन्द्रीय भूमिका में रखा गया है। ग्रीन पंचायत कार्यक्रम आरम्भ किया गया है, जिसके तहत सभी पंचायतों में 500 किलोवाट की ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। 
    योजना के पहले चरण में 24 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित करने को स्वीकृति मिल चुकी है और 16 पंचायतों में इसका कार्य आरम्भ हो चुका है। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं द्वारा उत्पादित बिजली से अर्जित 20 प्रतिशत राजस्व राज्य सरकार द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत के अनाथ बच्चों एवं विधवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाएगा। 
    ऊना जिला स्थित पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना का वाणिज्यिक संचालन 15 अप्रैल, 2024 से शुरू हो गया है और अब तक 79.03 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन और 22.91 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। 
    ऊना स्थित भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना का वाणिज्यिक संचालन 30 नवम्बर, 2024 से शुरू हो गया है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक 8.57 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन और 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। ऊना जिला में स्थित अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना में विद्युत उत्पादन 21 मई, 2025 से आरंभ हो गया है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक 5.89 मिलियन यूनिट का शुद्ध विद्युत उत्पादन किया गया है।
    31 मेगावाट की तीन सौर ऊर्जा परियोजनाएं निष्पादन चरण में हैं, 41 मेगावाट की चार सौर ऊर्जा परियोजनाएं निविदा चरण में हैं। कांगड़ा जिला के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
    ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर 250 किलोवाट से पांच मेगावाट तक की सौर ऊर्जा योजनाएं आवंटित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं द्वारा उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदा जाएगा। 
    इसके तहत अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की आवंटित ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाओं में से 403.09 मेगावाट क्षमता के विद्युत खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 
    हिमऊर्जा द्वारा 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की 120 माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं आरम्भ की जा चुकी हैं। 
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