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  • कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट
  • राज्यपाल और केंद्रीय विधि राज्य मंत्री ने ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया
  • आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने के लिए राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित
  • जनगणना-2027 के प्रथम चरण की 16 जून, 2026 से होगी शुरूआत
  • राज्यपाल ने फतेहपुर में श्री सर्व धर्म पीठ के तपोस्थान मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया
  • किशाऊ बांध परियोजना में हिमाचल को मिली बड़ी सफलता, आठ वर्ष पुराना वित्तीय विवाद सुलझाः मुख्यमंत्री
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  • किशाऊ बांध परियोजना में हिमाचल को मिली बड़ी सफलता, आठ वर्ष पुराना वित्तीय विवाद सुलझाः मुख्यमंत्री
     
     
     
    परियोजना के विद्युत घटक पर होने वाली 2,000 करोड़ रुपये की लागत लाभान्वित राज्य करेंगे वहन
    परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल को हर वर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना में प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए एक और मील पत्थर हासिल किया है। 
    मुख्यमंत्री के सतत प्रयासों से लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाली 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश हित की मजबूती से पैरवी की और पिछले आठ वर्षों से परियोजना की वित्तीय लागत वहन करने से संबंधित गतिरोध को समाप्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है। भारत सरकार ने परियोजना केे जल घटक के रूप में लाभान्वित होने वाले राज्यों दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक के रूप में होने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। 
    मुख्यमंत्री के दृढ़ प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश को होने वाला वित्तीय बोझ कम होगा, जबकि पूर्व की सरकार ऐसा करने में सफल नहीं हो पाई थी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश हित में इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के जल घटक के लिए भारत सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवा रही है, इस स्थिति में विद्युत घटक के लिए इसी प्रकार की सहायता न मिलना अनुचित था।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के कारण विस्थापन का सबसे अधिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश की आबादी पर पड़ेगा और राज्य को इससे अधिक नुकसान होगा। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना न्यायसंगत नहीं था तथा राष्ट्र निर्माण में हिमाचल प्रदेश के योगदान की उचित प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए।
    उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण होने के उपरान्त राज्य को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी। इससे राज्य के वित्तीय संसाधनों में महत्त्वपूर्ण वृद्धि होगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सदैव प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों को सर्वाेपरि रखा है तथा उनकी प्रभावी ढंग से रक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने बिजली परियोजनाओं में राज्य के वैध अधिकार, लंबित बकाया राशि तथा अन्य हितों की लड़ाई में हिमाचल प्रदेश की एक बड़ी जीत बताया।
    बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, लाभान्वित राज्यों के मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के. के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने फतेहपुर में श्री सर्व धर्म पीठ के तपोस्थान मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया



    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के फतेहपुर में श्री सर्व धर्म पीठ तपोस्थान, गुरुद्वारा श्री नानक ज्योत साहिब में नव-निर्मित मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने श्रद्धालुओं, संतों, सेवादारों और अतिथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह स्थान भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक समावेशिता और सद्भाव का एक जीवंत उदाहरण है जो सर्व धर्म समभाव की भावना को बढ़ाता है।
    इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि मान्यता के अनुसार गुरु नानक देव जी अपनी तीसरी उदासी के दौरान इस स्थान पर रहे थे। यहां मिली प्राचीन कृतियां, पुराने नागनी माता मंदिर और पवित्र बरगद के वृक्ष इस बात का प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र लंबे समय से तपस्या और साधना का केंद्र रहा है।
    गुरु नानक देव जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि समानता, करुणा, सेवा भाव और सत्य की उनकी शिक्षाएं वर्तमान परिपेक्ष्य में प्रासंगिक हैं और लोगों को मिल-जुलकर रहने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने मुख्य सेवादार संत बाबा श्री लवप्रीत जी महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस पवित्र स्थल को सर्व धर्म पीठ के रूप में विकसित करने की उनकी परिकल्पना भारत की प्राचीन समावेशी, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक सद्भाव की परंपरा को दर्शाती है।
    उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना, मंदिर तथा अखंड ज्योति का होना सच्ची आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जहां जाति, धर्म, सामाजिक स्थिति, शिक्षा या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और आस्था के द्वार सभी के लिए खुले रहते हैं।
    गुरु अर्जुन देव की शहीदी दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने पांचवें सिख गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान, साहस और सत्य, न्याय तथा मानवता के प्रति अटूट समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का जीवन लोगों को विपरीत परिस्थितियों में भी सेवा, धर्म और मानव कल्याण के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
    युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है और यह युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए खतरा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नियमित रूप से गुरुद्वारा साहिब में सेवा करें और अपने मित्रों तथा साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करें। सेवा भावना, संगत का साथ और धार्मिक स्थलों का आध्यात्मिक वातावरण युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है तथा इससे वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहते हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि नशे के समूल नाश के लिए समाज, परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक संगठनों और युवाओं की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। एकजुट प्रयासों से ही हम नशा-मुक्त गांव, नशा-मुक्त हिमाचल प्रदेश और अंततः नशा-मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।
    श्री गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि दरबार साहिब आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक सद्भाव, सामुदायिक सेवा और राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरेगा। ऐसे पवित्र स्थल नैतिक मूल्यों के संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों को मानवता, निस्वार्थ सेवा तथा राष्ट्र निर्माण के आदर्शों के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    इस अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. राजन सुशांत, जम्मू के पूर्व विधायक अश्विनी कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, धार्मिक नेता और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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  • आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने के लिए राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित



    हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आज यहां भूकंप, बादल फटने और जंगलों में आग लगने जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए 10वीं राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
    प्रदेश में मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की गई। पहला चरण 2 जून, 2026 को ओरिएंटेशन एवं समन्वय कार्यशाला के रूप में, दूसरा चरण 12 जून, 2026 को टेबल-टॉप अभ्यास के रूप में और अंतिम चरण आज पूरे प्रदेश में आयोजित भौतिक (फिजिकल) सिमुलेशन अभ्यास के रूप में संपन्न हुआ।
    मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर बहल और विशेष सचिव, आपदा प्रबंधन डॉ. पुष्पेंद्र राणा के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन, आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों, स्वास्थ्य विभाग, सशस्त्र बलों, विभिन्न विभागों तथा सामुदायिक प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन की वर्तमान तैयारियों की समीक्षा करना तथा बड़े पैमाने की आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और मजबूत बनाना है।
    अभ्यास के दौरान पिछले मॉक अभ्यासों में दिखाई गई प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इनमें विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान, संसाधनों की प्रभावी उपलब्धता तथा आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग शामिल थे। इससे जिलों में आपदा संबंधी तैयारियों और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा।
    इस अवसर पर कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान भी की गई, जिनमें और सुधार की आवश्यकता है। इनमें आपातकालीन परिस्थितियों में संचार व्यवस्था को मजबूत बनाना, जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अद्यतन करना, स्वास्थ्य सेवाओं की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना, यातायात प्रबंधन एवं निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा संसाधनों और राहत दलों की त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करना शामिल है। निरंतर तैयारियों के लिए नियमित जिला स्तरीय मॉक अभ्यास और सिमुलेशन ड्रिल आयोजित करने पर भी बल दिया।
    स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए व्यावहारिक जिला स्तरीय अतिरिक्त क्षमता तैयार करने पर विशेष बल दिया गया। इसके अंतर्गत अस्थायी बिस्तरों की व्यवस्था, आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता तथा लंबे समय तक चलने वाली आपात स्थितियों में अस्पतालों की सेवाएं सुचारू रूप से जारी रखने की योजनाओं पर चर्चा की गई।
    प्रतिभागियों ने जिला और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग व्यवस्था को औपचारिक रूप देने तथा आवश्यकता पड़ने पर भारी मशीनरी, विशेष राहत संसाधनों और हवाई सहायता की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
    अभ्यास के दौरान बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा, निकासी और राहत व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया।
    सभी जिलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी समेकित अतिरिक्त क्षमता योजनाएं और संसाधन तैनाती संबंधी योजनाएं प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिला प्रशासनों को अभ्यास कार्यक्रम, जन-जागरूकता संदेश और आपदा तैयारी संबंधी जानकारी पहले से जारी करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि आम जनता की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
    हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा तैयारी के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। क्षमता निर्माण, आपदा प्रबंधन योजनाओं का नियमित अद्यतन, मजबूत संचार व्यवस्था तथा समय-समय पर मॉक अभ्यास आयोजित करना किसी भी बड़ी आपदा के दौरान त्वरित, समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही जीवन, आजीविका और महत्वपूर्ण आधारभूत अधोसरंचना की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।
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  • राज्यपाल और केंद्रीय विधि राज्य मंत्री ने ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया
     
     
    न्याय, समानता और कानूनी शासन भारतीय लोकतंत्र का आधारः कविन्द्र गुप्ता
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय में भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव में ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया।
    राज्यपाल ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार न्याय, समानता और कानून के अनुरूप शासन है। भारत का संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सम्मान और न्याय तक समान पहुंच का अधिकार देता है। 
    उन्होंने कहा कि राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 39ए के अंतर्गत राज्य का उत्तरदायित्व है कि आर्थिक और अन्य किसी प्रकार की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाए। न्याय केवल न्यायालयों के निर्णयों तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसका अर्थ एक ऐसे समाज के निर्माण से जुड़ा है, जहां प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।
    राज्यपाल ने हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की बाधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के अनेक क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम हैं। इस स्थिति में तकनीक आधारित समाधान, डिजिटल मंच, कानूनी जागरूकता अभियान और स्थानीय सहायता प्रणाली नागरिकों को न्याय दिलाने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    उन्होंने ‘दिशा’ जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को घर-द्वार पर न्याय पहुंचाना है। टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बना रहे हैं।
    भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों से प्रो बोनो प्लैज पहल से जुड़ने तथा कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने में योगदान देने का आह्वान किया।
    राज्यपाल ने कहा कि सुधार उत्सव केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि न्याय क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों को भी स्वीकृति प्रदान करता है। इनमें न्यायिक अवसंरचना का विस्तार, डिजिटलीकरण, ई-कोटर््स, न्यायालयों की क्षमता में वृद्धि, वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र को बढ़ावा देना तथा विधिक सहायता सेवाओं को सुदृढ़ करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने न्याय वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जन-अनुकूल बनाया है तथा इससे लोगों को सरल, सुलभ और समयबद्ध न्याय मिल रहा है। 
    उन्होंने कहा कि युवा भारत का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि संविधान एक शैक्षणिक विषय नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शक के रूप में अपनाएं। 
    इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियां संविधान में निहित हैं और राष्ट्र सेवा में एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। 
    उन्होंने कहा कि भौगोलिक और आर्थिक प्रतिकूलताओं के कारण न्यायालयांे तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों में कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी पहलें इन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई हैं। इन मंचों के माध्यम से नागरिक अपनी कानूनी समस्याएं विशेषज्ञ वकीलों के समक्ष रख सकते हैं और निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, इसका खर्च भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की न्याय तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
    श्री मेघवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम का संचालन पूरे देश में किया जाता है लेकिन अभी भी लोगों को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।ऐसी कार्यशालाओं का उद्देश्य लोगों को इन सेवाओं के प्रति जागरूक करना तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए प्रमुख न्यायिक और कानूनी सुधारों की जानकारी देना है।
    टेली-लॉ सेवा के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर चुके लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस पहल के सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया।
    कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक भवानी सिंह पठानिया और सुधीर शर्मा, भारत सरकार के विधि विभाग के सचिव नीरज वर्मा, संयुक्त सचिव सुरेश कुमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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  • कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट



     एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शिमला जिले के कुपवी क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाया।
    मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
    इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य मन्नत तेगवान और हि.प्र. कांग्रेस कमेटी के महासचिव यशपाल तनाईक भी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया



    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज शिमला के पीटरहॉफ होटल में आयोजित नव निर्वाचित पंचायत प्रधान एवं उप-प्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
    मुख्यमंत्री ने प्रधानों एवं उप-प्रधानों को एंटी चिट्टा शपथ दिलाई तथा उनसे चिट्टा के खिलाफ अभियान में सक्रियता से सहभागिता सुनिश्चित करते हुए चिट्टा मुक्त पंचायत व समाज बनाने का आहवान् किया। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायत शासन व जनता के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी है और उन्हें पूर्ण आशा है कि वह विकास, जनसेवा और सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे। उन्होंने पंचायत प्रधानों से आग्रह किया कि वे समाज में खेल, शिक्षा, संस्कृति व सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे से दूर रखने में अपना योगदान दें।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समाज के हर वर्ग के कल्याण व समग्र विकास के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल व योजनाएं कार्यान्वित की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था, ग्रीन हिमाचल, शिक्षित हिमाचल, स्वस्थ हिमाचल, रोजगार, वित्तीय प्रबन्धन, नशा निवारण, कर्मचारी कल्याण सहित अन्य अनेक क्षेत्रों में दूरदर्शी सोच के साथ कार्य किया है।
    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जिला के नव-निर्वाचित पंचायत प्रधान और उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
    इस अवसर पर 7वें वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल, विधायक कुलदीप सिंह राठौर, मोहन लाल ब्राक्टा व हरीश जनारथा, महिला आयोग अध्यक्ष विद्या नेगी,  मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी व नवाचार) गोकुल बुटेल, अध्यक्ष हिमफेड महेश्वर सिंह चौहान, अध्यक्ष एपीएमसी देवानंद वर्मा, अध्यक्ष हिमकॉन विकेश चौहान, अध्यक्ष बाल आयोग अनीता ठाकुर, उपाध्यक्ष नशा निवारण बोर्ड संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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