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  • सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की शेष 30 प्रतिशत ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट जारी करने के आदेश जारी
  • आरजीवीएसवाई के तहत 4,000 हेक्टेयर भूमि में पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित
  • शासन का मूल जन केंद्रित प्रशासन होना चाहिए: राज्यपाल
  • विक्रमादित्य सिंह ने भारत सरकार से 5400 करोड़ रुपये केन्द्रीय हिस्सेदारी के रूप में प्रदान करने का आग्रह किया
  • प्राकृतिक खेती को राज्य का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिकाः मुख्यमंत्री
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  • प्राकृतिक खेती को राज्य का भविष्य बनाने में विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिकाः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने वर्चुअली 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए  
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला से वर्चुअल माध्यम से डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर में 3.63 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 107 विद्यार्थियों की क्षमता के छात्रावास का उद्घाटन किया। उन्होंने लाहौल एवं स्पीति के ताबो स्थित 1.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया।
    मुख्यमंत्री ने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर, में 8.57 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास किया। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, खग्गल, हमीरपुर में 8.68 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास भी किया। इन दोनों वर्किंग वुमन हॉस्टल्स की क्षमता 50-50 आक्यूपेंट की होगी। 
    उन्होंने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नौणी, सोलन  के मुख्य परिसर में 11.95 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल्स का भी शिलान्यास किया। इसकी क्षमता 100 आक्यूपेंट की हागी। 
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती हिमाचल प्रदेश का भविष्य है और राज्य सरकार इसे प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने में विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बावजूद राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और इन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से जुड़े दो लाख से अधिक किसान पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख को प्रमाण पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
    श्री सुक्खू ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए राज्य सरकार प्रगतिशील नीतियों और किसान हितैषी योजनाओं को लागू कर रही है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई फसलों के लिए हिमाचल देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रहा है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। इस वर्ष प्राकृतिक पद्धति से तैयार गेहूं के समर्थन मूल्य को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की के समर्थन मूल्य को 40 से बढ़ाकर 50 रुपये, पांगी घाटी की जौ के समर्थन मूल्य को 60 से 80 रुपये और हल्दी के समर्थन मूल्य को 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। पांगी को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली बार अदरक को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाया गया है, इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
    इस कार्यक्रम में कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, आईसीएआर के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आर.के. सिंह, रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य तथा विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी और विद्यार्थी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।
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  • शासन का मूल जन केंद्रित प्रशासन होना चाहिए: राज्यपाल
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 
    इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
    सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को  बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।
    नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।
    विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
    एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।
    उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।  
    हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी। 
    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे
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  • मुख्यमंत्री से टैक्सी एवं ट्रक ऑपरेटर्स के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज कांगड़ा जिला के विभिन्न टैक्सी एवं ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज कांगड़ा एयरपोर्ट पर भेंट की। 
    मुख्यमंत्री ने यूनियन के पदाधिकारियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना तथा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। 
    प्रतिनिधिमंडल ने कांगड़ा जिले में आरटीओ तथा एमवीआई के माध्यम से भी फिलहाल कमर्शियल वाहनों के लिए मैनुअल फिटनेस टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। 
    इस अवसर पर उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि पहाड़ी राज्यों की व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए इस विषय को केन्द्र सरकार के समक्ष उठाया गया है।   
    प्रतिनिधिमंडल में यूनियन के अध्यक्ष विक्की पठानिया, करतार पठानिया, मेहर सिंह ठाकुर, मोहिंदर सिंह, संजय शर्मा, कार्तिक शर्मा, कुलजीत राणा, नीका राम, कर्मा, अशोक शर्मा तथा कपिल शामिल थे।
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  • 30 जून तक सीबीएसई स्कूलों में सभी अध्यापक होंगे उपलब्धः मुख्यमंत्री
    शाह नहर का दफ्तर मंडी से फतेहपुर जाएगा वापिस, मुख्यमंत्री ने की घोषणा
    हिमकेयर योजना में गड़बड़ी पर जाँच के दिए आदेशः सीएम
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा ज़िला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शाह नहर के प्रमुख अभियन्ता प्रोजेक्ट का कार्यालय, जिसे पहले फतेहपुर से मंडी स्थानांतरित किया गया था, अब पुनः फतेहपुर में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के महिला मंडलों को 20-20 हज़ार रुपये की सहायता प्रदान करने तथा वजीर राम सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्वार के लिए 50 लाख रुपये देने की भी घोषणा की।
    कांगड़ा जिला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के जखबड़ में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्थानीय विधायक भवानी सिंह पठानिया ने जनसेवा के उद्देश्य से अढ़ाई करोड़ रुपये की नौकरी छोड़कर राजनीति का मार्ग चुना है। उन्होंने कहा कि पठानिया अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं और उनके विकास के लिए समर्पित हैं, ताकि क्षेत्र के लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सके।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को वर्तमान सरकार की तुलना में लगभग 60 हज़ार करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 54 हज़ार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये मिले, जबकि वर्तमान सरकार को केवल 17 हज़ार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग एक हज़ार करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया, जो आज भी खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश को प्रति वर्ष 8 से 10 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बेतुकी बयानबाजी कर रही है और पार्टी आंतरिक रूप से पांच गुटों में विभाजित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर योजना में अनियमितताएं हुई, यहां तक कि पुरुषों के भी ओवरी ऑपरेशन दिखाए गए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के धन का दुरुपयोग किया, जबकि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में शिक्षा का स्तर गिरा और वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत की गई है और 151 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि 30 जून तक इन सभी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति पूरी कर दी जाएगी, जिसके लिए राज्य स्तर पर चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे और वे भविष्य में चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश आज गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने में देश में 5वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि फीस के नाम पर बच्चों में कोई भेदभाव नहीं किया जाए।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार जन सेवा को ध्यान में रखकर काम करती है, न कि वोटों की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि फतेहपुर आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में आठ विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो पहले कभी भी नहीं हुआ। एम्स की तर्ज पर बेहतर मशीनें और मेडिकल कॉलेजों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं घर के नजदीक ही मिल सके। वहीं पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से उगाई गई हल्दी को 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा गाय के दूध को 61 रुपये तथा भैंस के दूध को 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के हाथ में सीधे पैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि कांगड़ा ज़िला के ढगवार में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, राज्य सरकार ने जलाशयों में मछली पालन करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया है। मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में मछुआरा परिवारों को 3,500 रुपये सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अनाथ बच्चों की सहायता के साथ-साथ विधवाओं और एकल नारियों के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं को समझते हुए प्रभावित परिवारों को भूमि के पट्टे प्रदान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बीपीएल सर्वे जारी है। छह चरणों में एक लाख से अधिक अति गरीब परिवारों की पहचान की जा चुकी है और सातवां चरण पूर्ण होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि अति गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार-सुखी परिवार योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह पेंशन तथा 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
    राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष और विधायक भवानी सिंह पठानिया ने सभी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नया बनने वाला पुल क्षेत्र के विकास में मदद करेगा, क्योंकि पहले रात आठ बजे के बाद निजी वाहनों की आवाजाही डैम के कारण बंद हो जाती है, लेकिन पुल शुरू होने से यहां वैकल्पिक मार्ग होगा और डैम से गुजरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पुल को प्राथमिकता देते हुए आज इस पुल का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि पुल बनने के बाद यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा और अगले दो वर्षांे में यहां उद्योग आएंगे। यह पुल पूरे हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी बदल देगा। उन्होंने कहा कि फतेहपुर में बस अड्डे, सिविल जज कोर्ट, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान के भवनों सहित अन्य परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जबकि आज ही मिनी सचिवालय का उद्घाटन किया है। इसके अलावा पानी और बिजली में सुधार के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
    इस अवसर पर कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, पूर्व विधायक अजय महाजन, अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य एडवोकेट दिग्विजय मल्होत्रा, कांग्रेस नेता कर्ण सिंह पठानिया, एडीसी विनय कुमार, एसपी नूरपुर पुलिस ज़िला कुलभूषण वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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  • मुख्यमंत्री ने फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में 153.81 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान 153.81 करोड़ रुपये की 8 विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए।
    उन्होंने ब्यास नदी पर 103.65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 800 मीटर लंबे स्पैन पुल का शिलान्यास किया। यह पुल टैरेस (पोंग बांध जसूर सड़क) को सथाना (भरवाईं डमताल सड़क) से जोड़ेगा जिससे फतेहपुर और जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र के लोग लाभान्वित होगें। इसके अतिरिक्त 13.60 करोड़ रुपये की लागत से आदर्श स्वास्थ्य संस्थान फतेहपुर, अनाज मंडी फतेहपुर के 3.14 करोड़ रुपयें के पार्किंग एवं अन्य कार्यों का भी शिलान्यास किया।
    मुख्यमंत्री नेे नाबार्ड के तहत 9.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले फतेहपुर से बदियाली वाया कुंडियाल, थेरू, सुनेट सड़क और 35 लाख रुपये की लागत से फतेहपुर में शहीद स्मारक का भी शिलान्यास किया।
    मुख्यमंत्री ने 12.82 करोड़ रुपये की लागत से बने संयुक्त कार्यालय भवन फतेहपुर, नाबार्ड के तहत 5.27 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कोडी बेला से पराल वाया जट्ट बेली सड़क तथा 5.89 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पलाख से चरूड़ी और मल्हारी से डुहाग सड़क का उद्घाटन किया।
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  • मुख्यमंत्री का ज्वालामुखी पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का सोमवार सायं कांगड़ा ज़िला के दो दिवसीय प्रवास पर ज्वालामुखी के सपड़ी हेलीपैड पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
    इस अवसर पर विधायक संजय रत्न, चेयरमैन कृषि बैंक राम चंद पठानिया, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, कांग्रेस नेता सुरेन्द्र मनकोटिया, अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक चौधरी, एसडीएम संजीव कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने गर्मजोशी से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने ज्वालामुखी विश्राम गृह में लोगों की समस्याएं भी सुनी।
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