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  • जीओसी-इन-सी, आरट्रेक ने राज्यपाल से की भेंट
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  • हिमाचल प्रदेश ने एलायंस एयर के साथ उड़ानों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए
  • राज्यपाल ने सुंदरनगर में आयुष्मान आरोग्य शिविर का शुभारम्भ किया
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  • राज्यपाल ने सुंदरनगर में बीबीएमबी ड्रेजर कॉम्प्लेक्स का दौरा किया
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  • राज्यपाल ने सुंदरनगर में बीबीएमबी ड्रेजर कॉम्प्लेक्स का दौरा किया
    जल निकासी एवं गाद प्रबंधन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज मंडी जिले के सुंदरनगर स्थित भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के ड्रेजर कॉम्प्लेक्स का दौरा किया।
    इस दौरान राज्यपाल को प्रबंधन बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों और संचालन तंत्र के बारे में अवगत करवाया गया। उन्होंने जल निकासी की तकनीकी व्यवस्थाओं तथा गाद (सिल्ट) के प्रबंधन एवं निस्तारण से संबंधित प्रक्रियाओं में विशेष रुचि दिखाई। यह जलाशयों की कार्यक्षमता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
    श्री गुप्ता ने अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए जल प्रवाह को सुचारू बनाए रखने, गाद प्रबंधन को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा समग्र बुनियादी ढांचे के रख-रखाव के लिए अपनाए गए उपायों की समीक्षा की। उन्होंने गाद संचयन और जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके अपनाने के लिए बोर्ड के प्रयासों की सराहना की।
    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार तथा बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने सुंदरनगर में आयुष्मान आरोग्य शिविर का शुभारम्भ किया
    टीबी-मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन बनाने का किया आह्वान
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंडी जिले के सुंदरनगर स्थित दिव्य मानव ज्योति सेवा ट्रस्ट डैहर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर का शुभारम्भ किया।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राज्य ने प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
    श्री गुप्ता ने क्षय रोग (टीबी) की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टीबी आज भी समाज में एक प्रमुख समस्या बनी हुई है, हालांकि राज्य इस बीमारी से निपटने में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में टीबी के मामलों की संख्या वर्ष 2022 में 15,760 से घटकर वर्ष 2025 में 14,653 हो गई है, जो स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों और समाज की सामूहिक भागीदारी को दर्शाता है।
    उन्होंने कहा कि राज्य में ज्यादा जोखिम वाले लगभग 1.49 लाख व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से लगभग सात लाख (46 प्रतिशत) लोगों की जांच एक्स-रे के माध्यम से की गई, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। उन्होंने कहा कि शिविरों में आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए निःशुल्क जांच की जा रही है, जबकि मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां दूरदराज और कठिन क्षेत्रों तक सेवाएं सुनिश्चित कर रही हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि ‘टीबी-मुक्त ग्राम पंचायत’ पहल के तहत सामुदायिक प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। राज्य की 3,615 ग्राम पंचायतों में से 2023 में 731 (20 प्रतिशत), 2024 में 823 (23 प्रतिशत) और 2025 में 1,052 (29 प्रतिशत) पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया गया। उन्होंने इसे टीबी उन्मूलन की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक कदम बताया।
    राज्यपाल ने कहा कि 100 दिवसीय विशेष अभियान इस दिशा में एक निर्णायक पहल है। इसके तहत राज्य में 5,176 उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों की पहचान की गई है, जहां आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ऐसे लक्षित प्रयास राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं।
    राज्यपाल ने सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि क्षय रोग उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, इसे जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, आशा कार्यकर्ताओं और प्रत्येक नागरिक को टीबी उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
    उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 25 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। साथ ही ब्लॉक स्तर पर उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में काफी सुधार हुआ है।
    राज्यपाल ने कहा कि लोक भवन की ओर से सभी मंत्रीगण, सांसदों और विधायकों को पत्र लिखकर टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों से ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने तथा उनके उपचार, पोषण और मानसिक सहयोग सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
    श्री गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी द्वारा कोटली मेडिकल ब्लॉक के 75 टीबी मरीजों को गोद लिया गया है जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत ‘निक्षय मित्र’ के रूप में पंजीकरण कर विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है।
    इससे पूर्व, राज्यपाल ने शिविर का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य एवं जांच सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने टीबी-मुक्त भारत अभियान के दूसरे चरण का ‘लोगो’ भी जारी किया। उन्होंने इस अवसर पर टीबी मरीजों को पोषण किट वितरित की और टीबी चौंपियन्स को सम्मानित किया तथा उपस्थित लोगों को टीबी-मुक्त भारत की शपथ भी दिलाई।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य सलाहकार डॉ. निशांत ने टीबी उन्मूलन अभियान में राज्य की उपलब्धियों की जानकारी दी। दिव्य मानव ज्योति सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष सत्य प्रकाश शर्मा ने संस्था के बारे में जानकारी साझा की।
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत किया और टीबी-मुक्त भारत अभियान के बारे में विस्तार से बताया।  
    ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, रोहांडा, डॉ. लाल सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, उपायुक्त अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य उपस्थित थे।
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  • जीओसी-इन-सी, आरट्रेक ने राज्यपाल से की भेंट

    जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी), आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रेक) लेफ्टिनेंट जनरल देवेन्द्र शर्मा ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने देश की संप्रभुता की रक्षा तथा दुर्गम क्षेत्रों एवं सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने सशस्त्र बलों की पेशेवर दक्षता, समर्पण और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे हर परिस्थिति में राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।
    श्री गुप्ता ने शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड द्वारा भारतीय सेना की प्रशिक्षण क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी को सुदृढ़ करने में दिए जा रहे योगदान की भी सराहना की। उन्होंने सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाने के लिए निरंतर आधुनिकीकरण, उन्नत प्रशिक्षण और तकनीकी अनुकूलन के महत्व पर बल दिया।
    लेफ्टिनेंट जनरल देवेन्द्र शर्मा ने राज्यपाल को आरट्रेक द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण पहलों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन प्रशिक्षण पहलों का उद्देश्य सेना के जवानों की तैयारियों और दक्षता को बढ़ाना है।
    उन्होंने इस अवसर पर राज्यपाल को एक कॉफी टेबल बुक भी भेंट की।
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  • प्रख्यात शिक्षाविदों ने राज्यपाल से की भेंट
    राज्यपाल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उद्योग-शिक्षा सहयोग पर दिया बल
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से प्रख्यात शिक्षाविदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज लोक भवन, शिमला में भेंट की और उच्च शिक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा संस्थागत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा की।
    प्रतिनिधिमंडल में महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप सिंह वालिया, राजकीय महाविद्यालय गुरदासपुर, पंजाब के प्राचार्य डॉ. अश्वनी कुमार भल्ला तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के डॉ. राज कुमार सिंह शामिल थे। 
    शिक्षाविदों ने राज्यपाल को अपने-अपने संस्थानों में चल रही विभिन्न शैक्षणिक पहलों से अवगत करवाया तथा शोध के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करने और शैक्षिक पहुंच बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन का अनुरोध किया।
    राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने में गहरी रुचि व्यक्त की और उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, छात्रों में शोध की प्रवृत्ति तथा युवाओं के समग्र विकास पर बल दिया।
    श्री गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों को पारंपरिक पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर नवाचार, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के केंद्र के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को उद्योग से संबंधित कौशल शिक्षण, उद्यमिता को बढ़ावा देना, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और व्यावसायिक शिक्षा को शैक्षणिक ढांचे में शामिल कर रोजगार क्षमता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों के संचालन में शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
    राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के संवाद से सहयोगात्मक शिक्षा की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र में उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित होगा।
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  • लोक भवन में राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार के राज्य स्थापना दिवस आयोजित
    ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करते हैं यह समारोहः राज्यपाल
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में आयोजित राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार के राज्य स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता एवं भावनात्मक जुड़ाव को प्रोत्साहित करना है।
    राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथियों को भाईचारे एवं एकता की भावना के प्रतीक के रूप में पारंपरिक हिमाचली टोपी एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया। 
    कार्यक्रम में राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इन राज्यों से संबंधित सरकारी कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश में अपने कार्यकाल एवं जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए, जिससे उन्हें यहां प्राप्त आत्मीयता, सहयोग एवं अपनत्व की भावना का पता चलता है।
    राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की शक्ति उसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसी पहलें विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देकर देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करती हैं।
    श्री गुप्ता ने कहा कि बिहार, राजस्थान एवं ओडिशा अपनी प्राचीन सभ्यताओं, समृद्ध इतिहास और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को समझना राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
    राज्यपाल ने कहा कि इन राज्यों के लोगों ने हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सौहार्द, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है, जिससे राष्ट्र की सामाजिक संरचना और सुदृढ़ होती है।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने लोक भवन, शिमला को सप्ताह में दो दिन आम जनता के लिए खोलने की घोषणा भी की। इस पहल का उद्देश्य लोक भवन को जनता के और समीप लाना तथा नागरिकों में इस संस्थान के प्रति अपनत्व और जुड़ाव की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि लोक भवन केवल आधिकारिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां जनता की आकांक्षाओं और सहभागिता की भावना भी प्रदर्शित होनी चाहिए। 
    कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ से दमन यात्रा के अनुभव जाने
    जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री का किया आभार
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला से वर्चुअल माध्यम से जिला चंबा के 35 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ से संवाद किया। यह बच्चे वर्तमान में दमन और दीव के शैक्षणिक भ्रमण पर हैं। 
    मुख्यमंत्री ने बच्चों से यह जानने का प्रयास किया कि उन्हंे इस यात्रा के दौरान कौन से नए अनुभव प्राप्त हुए, साथ ही यात्रा के दौरान उन्हें मिल रही सुविधाओं की भी जानकारी हासिल की।
    बच्चों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच से उन्हें इस यात्रा पर जाने का अवसर मिला। उन्होंने स्नेहिल भाव में कहा धन्यवाद सीएम सर। हम हवाई जहाज से दमन आए और यहां घूमने का आनंद ले रहे हैं। हमारे लिए यह खुशी की बात है कि प्रदेश सरकार हमारे सर्वांगीण विकास के लिए हर सुविधा प्रदान कर रही है। 
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना निराश्रित बच्चों के लिए बनाई गई है, क्योंकि राज्य के संसाधनों पर उनका भी समान अधिकार है। इस योजना के तहत राज्य सरकार उनकी शिक्षा और कोचिंग का खर्च वहन कर रही है तथा विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में भी प्रदेश सरकार आर्थिक सहायता कर रही है।
    ये बच्चे चंबा जिला के साहो, पांगी, चंबा और चिल्ली (तीसा) के बाल देखभाल संस्थानों से हैं, जिनमें 24 लड़कियां और 11 लड़के शामिल हैं। यह शैक्षणिक भ्रमण 31 मार्च से आरम्भ हुआ तथा 7 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। यात्रा का पहला पड़ाव दिल्ली में था, वहां बच्चे हिमाचल भवन में रहे। इसके उपरांत वे हवाई यात्रा द्वारा सूरत पहुंचे और वहां से दमन गए।
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