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  • मुख्यमंत्री ने किया ‘शक्ति की राजनीति’ पुस्तक का विमोचन
  • जनजातीय विकास विभाग की टीम ने पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय संस्कृति को जाना
  • राज्यपाल ने वर्चुअल माध्यम से चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के 17वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित
  • सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग में सेवानिवृत्ति समारोह आयोजित
  • राष्ट्रपति को दिया गया गरिमामय विदाई समारोह
  • लोक भवन में गुजरात और महाराष्ट्र के स्थापना दिवस आयोजित
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  • राष्ट्रपति को दिया गया गरिमामय विदाई समारोह
    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आज शिमला के अनाडेल हेलीपैड पर हिमाचल प्रदेश में उनके पांच दिवसीय प्रवास के बाद गरिमामय विदाई दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू उपस्थित रहे।
    पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी तथा अन्य वरिष्ठ नागरिक, पुलिस और सेना के अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे।
    राष्ट्रपति ने दिल्ली रवाना होने से पूर्व शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा किया। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।
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  • राज्यपाल ने वर्चुअल माध्यम से चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के 17वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित
    राज्यपाल ने किया युवा वैज्ञानिकों से अनुसंधान के माध्यम से किसान कल्याण में कार्य करने का आह्वान
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज युवा वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे शोध के क्षेत्र में अर्जित नई उपलब्धियों का उपयोग किसानों की आर्थिकी में बढ़ोतरी की दिशा में करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि कृषि उत्पादकता और देश की समग्र अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
    राज्यपाल ने आज लोक भवन से वर्चुअल माध्यम से पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
    राज्यपाल ने उपाधि हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह विद्यार्थी जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, यहां से वे अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी कर एक नए चरण में प्रवेश करते हैं तथा अपने ज्ञान को व्यवहारिक रूप में उपयोग में लाते हैं। उन्होंने इसे आत्मावलोकन का अवसर बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।
    विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से इसकी उत्कृष्टता को कायम रखा है। 
    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है, जबकि लगभग 62 प्रतिशत कार्यबल इस क्षेत्र में कार्यरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9.4 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जो कृषि अनुसंधान और नवाचार के महत्व को दर्शाता है।
    विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये इसकी अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी नेतृत्व को प्रदर्शित करती हैं। इसके अतिरिक्त यह ग्रामीण विकास, सामाजिक उत्थान और राष्ट्र निर्माण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।
    राज्यपाल ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करता रहेगा और राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे किसान व्यापक रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।  
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  • मुख्यमंत्री ने किया ‘शक्ति की राजनीति’ पुस्तक का विमोचन
    शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगी पुस्तक: मुख्यमंत्री 
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लेखक अमर कुमार की पुस्तक ‘शक्ति की राजनीति’ (पॉवर पोलिटिक्स) का विमोचन किया।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक पॉल एफ. केनेडी के महाशक्तियों के रेखीय पतन के सिद्धांत में संशोधन करते हुए शक्ति-राजनीति के नवीन आयाम प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में अमेरिका, चीन, रूस, भारत सहित अन्य देशों की वैश्विक राजनीति का शोधपरक विश्लेषण किया गया है, जो शोधार्थियों एवं विषय के अध्येताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
    मुख्यमंत्री ने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
    लेखक अमर कुमार वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित वैश्विक राजनीतिक परिषद् की अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में भाग ले चुके हैं। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिषद् के अस्थायी तथा भारतीय राजनीतिक परिषद् के स्थायी सदस्य हैं और वैश्विक राजनीति पर निरंतर लेखन में संलग्न रहते हैं। वे एनएसयूआई के पूर्व महासचिव भी रह चुके हैं।
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  • कसुम्पटी क्षेत्र के चियोग में 5.50 करोड़ से बनेगा स्कूल का नया भवन, 16 करोड़ से स्थापित होगा 66 केवी सब-स्टेशन
    मुख्यमंत्री ने की चियोग स्कूल को सीबीएसई बनाने की घोषणा, एफआरए के तहत स्वीकृत सड़कों के लिए मिलेगा समुचित धन
    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सृदृढ़ करने में अहम भूमिका निभायेंगी ग्रीन पंचायतें
    भाजपा करती है विरोध की राजनीति, हम डरते नहीं: सीएम
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला ज़िला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के चियोग में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, चियोग के नए भवन के लिए 5.50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्कूल में अगले वर्ष से सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र में बिजली की समस्या का समाधान करने के लिए 66 के.वी. सब-स्टेशन के निर्माण के लिए 16 करोड़ रुपये देने की घोषणा की, जिसे एक साल के भीतर बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। उन्होंने कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के लिए एफआरए के तहत स्वीकृत बंगापानी से चडैल, चियोग से जठाई, धलैऊ से जनुनाला, चियोग से मेहाना, धलैऊ से धार, फागू से सरिवन तथा जुब्बड़ से कढरब सड़कों के लिए समुचित धन उपलब्ध करवाने की घोषणा की। उन्होंने धरेच सिंचाई परियोजना के लिए धन उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।
    श्री सुक्खू ने अपने छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए कहा कि आज कई मेरे साथी यहां उपस्थित हैं, जिन्होंने जीवन के हर पड़ाव पर उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि शिमला नगर निगम से वह पार्षद बने और यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं और प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से उन्हें आज प्रदेश की बागडोर संभालने का अवसर मिला है।
    उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने महज राजनीतिक लाभ के लिए विधानसभा चुनावों से छह महीने पहले पांच हज़ार करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांट दीं। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार की ग़लत नीतियों के कारण हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ने के बाद देश में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए तथा पहली कक्षा से अंग्रेज़ी मीडियम में पढ़ाई आरंभ की। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में लाए गए सुधारों के कारण आज हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। आज प्रदेश में 151 सीबीएसई स्कूल भी खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा ‘‘भाजपा विरोध की राजनीति करती है लेकिन हम विरोध से नहीं डरते। प्रदेश के सभी सीबीएसई स्कूलों में 30 जून तक सभी विषयों के अध्यापक उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। जहां पर अन्य विषयों के साथ-साथ संगीत और योग के अध्यापक भी उपलब्ध होंगे, ताकि बच्चों का संपूर्ण विकास हो सके और उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके। आज हिमाचल प्रदेश पूर्ण रूप से साक्षर प्रदेश बन गया है।“
    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय विधायक एवं मंत्री अनिरुद्ध सिंह क्षेत्र के विकास के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। पहली बार कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के धरेच में स्थापित 500 किलोवाट के सौर ऊर्जा संयंत्र ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जिससे केवल पंचायत को ही प्रतिवर्ष लगभग 14 लाख रुपये मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रीन पंचायतें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रुप में अपनाया है। ऐसे बच्चों के लिए कानून बनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत विधवाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का ख़र्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा डॉ. वाई.एस. परमार ऋण योजना के तहत बच्चों को शिक्षा के लिए एक प्रतिशत की दर से 20 लाख रुपये का क़र्ज़ उपलब्ध करवाया जा रहा है।
    उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में निर्मित एक हज़ार करोड़ रुपये के भवन खाली पड़े हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि इन खाली भवनों में कुछ सरकारी कार्यालय शिफ्ट किए जा सकें। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी के रूप में 54 हज़ार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि वर्तमान राज्य सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17 हज़ार करोड़ रुपये मिले हैं, जो चार गुना कम है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस बार केंद्र सरकार ने आरडीजी बंद करके प्रदेश के लोगों का यह अधिकार छीन लिया है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्तमान राज्य सरकार को दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा, जिनमें जान-माल का भारी नुक़सान हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक आम परिवार का दर्द समझता हूं। अधिकारी कहते थे घर बनाने के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा नहीं दे सकते क्योंकि क़ानून ही ऐसा है। लेकिन हमने इन परिवारों को फिर से बसाने के लिए पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घर पर सात लाख रुपये की राशि दी। प्रदेश में आकर प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की, लेकिन हमें अभी तक यह पैसा नहीं मिला है।’’
    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए भी राज्य सरकार ने प्रयास किए, जबकि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस क्षेत्र की सुध नहीं ली। हम 20-20 साल पुरानी मशीनों को एम्स दिल्ली की तर्ज़ पर आधुनिक मशीनों से बदल रहे हैं। प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की जा चुकी है, जिससे प्रदेश में ही लोगों को वर्ल्ड क्लास इलाज उपलब्ध हो रहा है।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रही है। मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत रिकॉर्ड 110 करोड़ का सेब ख़रीदा गया है। गाय के दूध का रेट बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि भैंस के दूध का रेट 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को बंद कर दिया है, जिससे पंचायतों में कार्य प्रभावित होंगे।
    उन्होंने इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 50 हज़ार रुपये स्वीकृत किए तथा इस समारोह में भाग लेने वाले चार महिला मंडलों को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की।  
    इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने जय ईश्वरी माता मंदिर में पूजा अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
    ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस अवसर पर कहा कि साढ़े तीन साल में कुसुम्पटी क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रही। उन्होंने उद्घाटनों और शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चियोग बाईपास कांग्रेस सरकार की देन है और कांग्रेस सरकार ही प्रदेश में समग्र विकास करवाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के समय में यहां का विकास जानबूझ कर रोका गया लेकिन ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मुख्यमंत्री बनते ही यहां के विकास की गति में तेज़ी आई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद हमारी सरकार हिमाचल प्रदेश को विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीन पंचायतें बनाने की शुरुआत शिमला ज़िला के धरेच से हुई है और आज 500 किलोवाट की सौर ऊर्जा परियोजना का लोकार्पण कर दिया गया है।
    इस अवसर पर राज्य नशा निवारण बोर्ड के उप-संयोजक संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, एसपी गौरव सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने 51.10 करोड़ रुपये की 15 परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास किए

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ज़िला शिमला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान धरेच तथा चियोग में 51.10 करोड़ रुपये की 15 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किये।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 15.23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली फागू से धरेच सड़क, 7.85 करोड़ रुपये से बनने वाली धरेच से चटोग वाया मांडा सड़क, 4.81 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली डरन से जुब्बड़ सड़क, 1.50 करोड़ रुपये से बनने वाली खेती जुब्बड़ से खद्ररव सड़क, 2 करोड़ रुपये की फागु से सरिऊ सड़क, 2.70 करोड़ रुपये की बंगापानी से चडैल सड़क, 3 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली चियोग से जठाई सड़क, 2.50 करोड़ रुपये की धलेऊ से जनू नाला सड़क, 2.60 करोड़ रुपये से बनने वाली न्होग से कनेशी सड़क, 1 करोड़ रुपये की धलैऊ से धार सड़क, 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली क्यानाला से सरोग सड़क, 90 लाख रुपये से बनने वाली चियोग बाजार से गांव मेहाना सड़क, 1 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली तलाई-देहना से गांव करयाल सड़क तथा 1.14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक केंद्र एवं पंचायत घर धरेच का शिलान्यास किया।  
    इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने 2.85 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चियोग बाईपास सड़क का उद्घाटन भी किया।
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  • शिमला ज़िला की धरेच बनी प्रदेश की पहली ग्रीन पंचायत
    मुख्यमंत्री ने 500 किलो वाट सौर ऊर्जा संयंत्र का किया शुभारंभ
     
    हिमाचल प्रदेश में ग्रीन पंचायत परियोजना अब धरातल पर साकार होने लगी है। शिमला ज़िला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र की धरेच ग्राम पंचायत प्रदेश की पहली ऐसी ग्रीन पंचायत बन गई है, जिसमें 500 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना ने सफलतापूर्वक उत्पादन आरंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने कसुम्पटी दौरे के दौरान इस परियोजना का उद्घाटन किया। क़रीब 1 करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का निर्माण कार्य जनवरी 2025 में आरंभ हुआ था और 30 मार्च 2026 को इसे विद्युत् ग्रिड से जोड़ दिया गया था।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस सौर परियोजना से प्रतिदिन लगभग 3000 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, जबकि वार्षिक उत्पादन करीब 8 लाख यूनिट रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत् बोर्ड लिमिटेड इस बिजली को 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से ख़रीदेगा। इससे न केवल राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि ग्राम पंचायत को भी प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख रुपये की नियमित आय होगी।
    मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को समावेशी और जनकल्याणकारी मॉडल बताते हुए कहा कि इससे पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। परियोजना से प्राप्त राजस्व में से 30 प्रतिशत राशि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों, 20 प्रतिशत अनाथों और विधवाओं के कल्याण, 20 प्रतिशत राज्य सरकार, 10 प्रतिशत हिम ऊर्जा तथा 20 प्रतिशत संचालन एवं रख-रखाव के लिए हिम ऊर्जा को प्रदान की जाएगी।
    उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की अनुमानित आयु वाली यह परियोजना राज्य में  सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ होने से उनकी आर्थिकी में सुधार होगा।
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