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  • राज्यपाल ने शिमला में आयोजित गणेश उत्सव में भाग लिया
  • किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजनाः हिमाचल सरकार ने सुरक्षित किए राज्य के हित, 2000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ को लाभान्वित राज्य करेंगे वहन
  • मुख्यमंत्री ने श्री रेणुका जी में पीएमजीएसवाई-4 के तहत 28.22 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पांच सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास किए
  • किशाऊ परियोजना से हिमाचल को प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय होगीः मुख्यमंत्री
  • विभागीय परीक्षाएं 26 नवम्बर से होंगी आयोजित
  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतिबिंबः राज्यपाल
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  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतिबिंबः राज्यपाल
     
     
     
    युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया
    नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर आयोजित भारतीय युवा संसद में 26 राज्यों के विद्यार्थियों ने लिया भाग
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज युवाओं से संविधान के मूल्यों को बनाए रखने, लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल भविष्य के नेता ही नहीं बल्कि आज के भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सक्रिय भागीदार और हितधारक भी हैं।
    राज्यपाल ने जयपुर में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भारतीय युवा संसद के 31वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए देश के 26 राज्यों से आए युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी की सराहना की। इन प्रतिनिधियों ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर सार्थक विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच भारत के लोकतंत्र की जीवंतता, समावेशिता और प्रगतिशील स्वरूप को प्रतिबिंबित करते हैं।
    श्री गुप्ता ने भारतीय युवा संसद से वर्ष 1999 से अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि इस पहल ने विशेष रूप से वर्ष 2002 के बाद युवाओं को संविधान से परिचित करवाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने और राष्ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद को जिम्मेदार नागरिकता और भावी नेतृत्व की नर्सरी बताते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक भावना की जड़ें देश की गहरी सभ्यतागत परंपराओं में निहित हैं। वैदिक काल में ‘सभा’ और ‘समिति’ जैसी संस्थाओं में दिखाई देने वाली संवाद, विचार-विमर्श और सामूहिक निर्णय लेने की परंपराएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारतीय सभ्यता में सहभागी शासन को लंबे समय से महत्त्व दिया जाता रहा है।
    राज्यपाल ने बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और संस्थाओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह संवाद, भागीदारी, जवाबदेही, सहमति और असहमति की एक निरंतर प्रक्रिया है, जो जनविश्वास पर आधारित होती है। उन्होंने युवाओं से संवैधानिक मूल्यों को समझने और उन्हें अपने आचरण तथा सार्वजनिक जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।
    राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र के प्रति उनका दृष्टिकोण आज की युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन यह मनभेद में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हितों से ऊपर हमेशा राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को सदैव ही भारत की प्रगति और विकसित भारत के संकल्प का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने तथा महिलाओं के नेतृत्व में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के लिए व्यापक अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
    श्री गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और प्रत्येक नागरिक की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
    राज्यपाल ने भारत के बढ़ते वैश्विक कद को रेखांकित करते हुए नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विभिन्न हितों वाले देशों को एक साथ लाने और उनके बीच सहमति बनाने की क्षमता देश की बढ़ती कूटनीतिक दक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत संघर्ष के बजाय संवाद, टकराव के बजाय कूटनीति और मानवता के व्यापक हित में विश्वास करता है।
    उन्होंने कहा कि भारत अब ऐसा राष्ट्र नहीं है जो केवल दुनिया की बात सुनता है बल्कि भारत अब ऐसा राष्ट्र है जो दुनिया को एक साथ लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका के लिए बढ़ता समर्थन देश के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
    श्री गुप्ता ने युवा प्रतिभागियों से जिम्मेदार और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व का अर्थ समाज को साथ लेकर आगे बढ़ना, कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज बनना, लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करना और हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देना है।
    राज्यपाल ने देशभर से आए युवा प्रतिनिधियों, आयोजकों, पदाधिकारियों और मार्गदर्शकों को राष्ट्रीय सत्र को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए बधाई दी।
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  • मुख्यमंत्री ने श्री रेणुका जी में पीएमजीएसवाई-4 के तहत 28.22 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पांच सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास किए
     
     
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज वर्चुअल माध्यम से सिरमौर जिला के श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-4) के पहले बैच के तहत पांच महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास किए। 
    पीएमजीएसवाई-4 के तहत 28.22 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पांच सड़क परियोजनाओं में बिरला-गाटू से मढारा सड़क, कटवारी बगराथ से बिरला सड़क, ठाकर से कुज्जेवाला सड़क, गांव बखान से केलेवाला सड़क तथा खरकोली से उंग्गर कांडो सड़क शामिल हैं।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र की जनता को इन महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें प्रगति और विकास का प्रतीक हैं। प्रदेश सरकार राज्य में सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में इन सड़कों के निर्माण से संपर्क सुविधा बेहतर होगी तथा ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी।
    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को पीएमजीएसवाई के तहत पांच सड़कों के शिलान्यास के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने तथा सड़कों में सुधार को प्राथमिकता प्रदान कर रही है।
    इस अवसर पर उपस्थित सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देशभर में ग्रामीण सड़क संपर्क सुविधा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिले और प्रदेश के अन्य हिस्सों में इन परियोजनाओं की स्वीकृति ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
    इस अवसर पर उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, अधीक्षण अभियंता हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग अरविंद शर्मा तथा अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।
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  • किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजनाः हिमाचल सरकार ने सुरक्षित किए राज्य के हित, 2000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ को लाभान्वित राज्य करेंगे वहन
     
     
    केन्द्र ने 15,624 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में हिमाचल के हितों के संरक्षण को सहमति दी
    राज्य सरकार के प्रयासों से आठ वर्षों का गतिरोध हुआ खत्म, विद्युत हिस्सेदारी से वार्षिक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना
     
    किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आज नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान राज्यों ने 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित टौंस नदी पर 15,624 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस परियोजना का निर्माण किया जाएगा।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए।
    किशाऊ बांध परियोजना में प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने एक मील पत्थर हासिल किया है। मुख्यमंत्री के सतत और दृढ़ प्रयासों के परिणामस्वरूप परियोजना की वित्तीय लागत वहन करने को लेकर पिछले आठ वर्षों से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करते हुए अब यह परियोजना आकार ले रही है। 
    मुख्यमंत्री ने मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 16 जून, 2026 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से बिजली घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्यों द्वारा वहन करने पर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने के लिए इस मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रमुखता से इस पक्ष को उठाया कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है और इस स्थिति में बिजली घटक के लिए इस प्रकार की सहायता उपलब्ध न करवाना अनुचित है।
    उन्होंने कहा कि परियोजना के कारण प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना अनुचित है और राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के बहुमूल्य योगदान की समुचित भरपाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है, जो राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा विभिन्न मंचों पर प्रदेश के हितों को प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना में राज्य के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी को सुरक्षित करना प्रदेश के हितों की रक्षा के संघर्ष में एक बड़ी जीत है।
    इस अवसर पर मुख्य सचिव के. के. पंत तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. नजीम भी उपस्थित थे।
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  • राज्यपाल ने शिमला में आयोजित गणेश उत्सव में भाग लिया
     
     
     
    पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की शांति और सुख-समृद्धि की कामना की
    सनातन परंपराओं के संरक्षण और युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज शिमला के मिडिल बाजार में सिद्धि विनायक सेवा मंडल ट्रस्ट द्वारा आयोजित गणेश उत्सव में भाग लिया। उन्होंने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर हिमाचल प्रदेश की जनता के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
    राज्यपाल ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गणेश उत्सव के आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं तथा युवा पीढ़ी को देश की समृद्ध सनातन परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान गणेश प्रदेशवासियों के जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें और हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक घर में सुख एवं समृद्धि लाएं।
    सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल्यों से परिचित करवाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
    नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति ने नई ऊंचाइयों को छुआ है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश का प्रभाव बढ़ा है और विश्व के विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं।
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  • युवाओं के नेतृत्व से होगा स्वस्थ एवं संवेदनशील समाज का निर्माणः राज्यपाल
     
     
    एचपीएनएलयू में ‘स्वास्थ्य मंथन-2026’ का आयोजन 
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने युवाओं का आह्वान किया कि वे समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने तथा मानव सेवा की भावना को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाएं। राज्यपाल रविवार को हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू), शिमला में आयोजित ‘स्वास्थ्य मंथन-2026’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    एचपीएनएलयू की एनसीसी इकाई ने राज्य एवं जिला रेडक्रॉस सोसायटी, हिमाचल प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में स्वस्थ कल के लिए युवा नेतृत्व का सशक्तिकरण विषय पर इस मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया था।
    विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि कार्यक्रम की विषयवस्तु ‘स्वस्थ कल के लिए युवा नेतृत्व का सशक्तिकरण’ वर्तमान में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि युवा न केवल देश का भविष्य हैं, बल्कि आज की सबसे बड़ी ताकत भी युवाओं में ही निहित है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए युवाओं में जागरूकता, संवेदनशीलता और सक्रिय भागीदारी जैसे गुणों का होना आवश्यक है।
    राज्यपाल जो राज्य रेडक्रॉस के अध्यक्ष भी हैं ने कहा कि स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध व्यक्ति की गरिमा, समानता, जागरूकता और सामाजिक न्याय से भी है। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि बीमारी के साथ-साथ अज्ञानता और सामाजिक कलंक जैसी बुराईयों के खिलाफ समाज को एकजुट होकर लड़ना होगा।
    उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे प्रमाणिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का प्रसार करें, मिथकों और भ्रांतियों को चुनौती दें तथा लोगों को आवश्यकता पड़ने पर उचित स्वास्थ्य सेवाएं और परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि कानून केवल नियमों और प्रावधानों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह लोगों की गरिमा, समानता और अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए जनस्वास्थ्य, कानून और मनोविज्ञान का आपसी समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    युवाओं से विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नेतृत्व पद या अधिकार से परिभाषित नहीं होता बल्कि सच्चा नेतृत्व जिम्मेदारी और सेवा की भावना से परिभाषित होता है। उन्होंने युवाओं से ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया, जहां लोग बिना किसी भय के सहायता प्राप्त कर सकें, मरीजों के साथ गरिमा एवं सम्मान के साथ व्यवहार हो, सही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी व्यक्ति को उसकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
    राज्यपाल ने ‘स्वास्थ्य मंथन-2026’ के सफल आयोजन के लिए हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, यूथ रेडक्रॉस, राज्य एवं जिला रेडक्रॉस, एनसीसी, संकाय सदस्यों तथा आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यक्रम के दौरान हुए विचार-विमर्श से देशभर में स्वास्थ्य जागरूकता, युवा नेतृत्व और मानवीय सेवा के क्षेत्र में नई पहल को प्रेरणा मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से ‘स्वास्थ्य मंथन-2026’ के समापन की घोषणा की।
    इससे पहले एचपीएनएलयू की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने इस अवसर पर राज्यपाल का स्वागत किया।
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  • मुख्यमंत्री ने फोरेस्ट स्पोर्टस मीट के विजेताओं को बधाई दी
     
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला जिले के रामपुर में आयोजित हिमाचल प्रदेश वन विभाग की 27वीं वार्षिक खेलकूद एवं कर्तव्य प्रतियोगिता के विजेताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई दी है। 11 से 13 सितम्बर तक आयोजित इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में राज्य के एक हजार से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। 
    विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने उनके समर्पण, कड़ी मेहनत, अनुशासन और खेल भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वस्थता और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देते हैं बल्कि टीम एकता, नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावनाओं जैसे गुणों का भी विकास करते हैं।
    मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की भागीदारी और सराहनीय प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हर प्रतिभागी प्रतिबद्धता और खेल भावना का प्रदर्शन करने के लिए सराहना का पात्र है। इस तरह के खेल आयोजन कर्मचारियों के बीच भाईचारे और टीम भावना को मजबूत करते हुए प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
    श्री सुक्खू ने कहा कि वन विभाग राज्य की समृद्ध वन संपदा की रक्षा और संरक्षण तथा राज्य के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वन एवं जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के स्थायी प्रबंधन में वन विभाग के कर्मियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभागीय कर्मियों के लिए आयोजित किए जाने वाले खेल आयोजनों से वे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं और उनमें एकता और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने और कर्मचारियों के साथ-साथ युवाओं में एक स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खेलों में नियमित भागीदारी से शारीरिक फिटनेस बढ़ाने, तनाव कम करने और दक्षता में सुधार करने में मदद मिलती है। 
    इस प्रतियोगिता में हमीरपुर वन सर्कल को ओवरऑल चैंपियन घोषित किया गया जबकि रामपुर वन सर्कल दूसरे स्थान पर रहा।
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