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  • चिट्टा के खिलाफ लड़ाई जन आंदोलन में हुई परिवर्तित: मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया
  • कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट
  • राज्यपाल और केंद्रीय विधि राज्य मंत्री ने ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया
  • आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने के लिए राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित
  • जनगणना-2027 के प्रथम चरण की 16 जून, 2026 से होगी शुरूआत
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  • आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने के लिए राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित



    हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आज यहां भूकंप, बादल फटने और जंगलों में आग लगने जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए 10वीं राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
    प्रदेश में मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की गई। पहला चरण 2 जून, 2026 को ओरिएंटेशन एवं समन्वय कार्यशाला के रूप में, दूसरा चरण 12 जून, 2026 को टेबल-टॉप अभ्यास के रूप में और अंतिम चरण आज पूरे प्रदेश में आयोजित भौतिक (फिजिकल) सिमुलेशन अभ्यास के रूप में संपन्न हुआ।
    मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर बहल और विशेष सचिव, आपदा प्रबंधन डॉ. पुष्पेंद्र राणा के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन, आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों, स्वास्थ्य विभाग, सशस्त्र बलों, विभिन्न विभागों तथा सामुदायिक प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन की वर्तमान तैयारियों की समीक्षा करना तथा बड़े पैमाने की आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और मजबूत बनाना है।
    अभ्यास के दौरान पिछले मॉक अभ्यासों में दिखाई गई प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इनमें विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान, संसाधनों की प्रभावी उपलब्धता तथा आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग शामिल थे। इससे जिलों में आपदा संबंधी तैयारियों और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा।
    इस अवसर पर कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान भी की गई, जिनमें और सुधार की आवश्यकता है। इनमें आपातकालीन परिस्थितियों में संचार व्यवस्था को मजबूत बनाना, जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अद्यतन करना, स्वास्थ्य सेवाओं की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना, यातायात प्रबंधन एवं निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा संसाधनों और राहत दलों की त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करना शामिल है। निरंतर तैयारियों के लिए नियमित जिला स्तरीय मॉक अभ्यास और सिमुलेशन ड्रिल आयोजित करने पर भी बल दिया।
    स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए व्यावहारिक जिला स्तरीय अतिरिक्त क्षमता तैयार करने पर विशेष बल दिया गया। इसके अंतर्गत अस्थायी बिस्तरों की व्यवस्था, आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता तथा लंबे समय तक चलने वाली आपात स्थितियों में अस्पतालों की सेवाएं सुचारू रूप से जारी रखने की योजनाओं पर चर्चा की गई।
    प्रतिभागियों ने जिला और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग व्यवस्था को औपचारिक रूप देने तथा आवश्यकता पड़ने पर भारी मशीनरी, विशेष राहत संसाधनों और हवाई सहायता की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
    अभ्यास के दौरान बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा, निकासी और राहत व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया।
    सभी जिलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी समेकित अतिरिक्त क्षमता योजनाएं और संसाधन तैनाती संबंधी योजनाएं प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिला प्रशासनों को अभ्यास कार्यक्रम, जन-जागरूकता संदेश और आपदा तैयारी संबंधी जानकारी पहले से जारी करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि आम जनता की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
    हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा तैयारी के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। क्षमता निर्माण, आपदा प्रबंधन योजनाओं का नियमित अद्यतन, मजबूत संचार व्यवस्था तथा समय-समय पर मॉक अभ्यास आयोजित करना किसी भी बड़ी आपदा के दौरान त्वरित, समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही जीवन, आजीविका और महत्वपूर्ण आधारभूत अधोसरंचना की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।
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  • राज्यपाल और केंद्रीय विधि राज्य मंत्री ने ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया
     
     
    न्याय, समानता और कानूनी शासन भारतीय लोकतंत्र का आधारः कविन्द्र गुप्ता
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय में भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव में ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया।
    राज्यपाल ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार न्याय, समानता और कानून के अनुरूप शासन है। भारत का संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सम्मान और न्याय तक समान पहुंच का अधिकार देता है। 
    उन्होंने कहा कि राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 39ए के अंतर्गत राज्य का उत्तरदायित्व है कि आर्थिक और अन्य किसी प्रकार की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाए। न्याय केवल न्यायालयों के निर्णयों तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसका अर्थ एक ऐसे समाज के निर्माण से जुड़ा है, जहां प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।
    राज्यपाल ने हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की बाधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के अनेक क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम हैं। इस स्थिति में तकनीक आधारित समाधान, डिजिटल मंच, कानूनी जागरूकता अभियान और स्थानीय सहायता प्रणाली नागरिकों को न्याय दिलाने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    उन्होंने ‘दिशा’ जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को घर-द्वार पर न्याय पहुंचाना है। टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बना रहे हैं।
    भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों से प्रो बोनो प्लैज पहल से जुड़ने तथा कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने में योगदान देने का आह्वान किया।
    राज्यपाल ने कहा कि सुधार उत्सव केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि न्याय क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों को भी स्वीकृति प्रदान करता है। इनमें न्यायिक अवसंरचना का विस्तार, डिजिटलीकरण, ई-कोटर््स, न्यायालयों की क्षमता में वृद्धि, वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र को बढ़ावा देना तथा विधिक सहायता सेवाओं को सुदृढ़ करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने न्याय वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जन-अनुकूल बनाया है तथा इससे लोगों को सरल, सुलभ और समयबद्ध न्याय मिल रहा है। 
    उन्होंने कहा कि युवा भारत का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि संविधान एक शैक्षणिक विषय नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शक के रूप में अपनाएं। 
    इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियां संविधान में निहित हैं और राष्ट्र सेवा में एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। 
    उन्होंने कहा कि भौगोलिक और आर्थिक प्रतिकूलताओं के कारण न्यायालयांे तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों में कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी पहलें इन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई हैं। इन मंचों के माध्यम से नागरिक अपनी कानूनी समस्याएं विशेषज्ञ वकीलों के समक्ष रख सकते हैं और निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, इसका खर्च भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की न्याय तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
    श्री मेघवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम का संचालन पूरे देश में किया जाता है लेकिन अभी भी लोगों को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।ऐसी कार्यशालाओं का उद्देश्य लोगों को इन सेवाओं के प्रति जागरूक करना तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए प्रमुख न्यायिक और कानूनी सुधारों की जानकारी देना है।
    टेली-लॉ सेवा के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर चुके लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस पहल के सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया।
    कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक भवानी सिंह पठानिया और सुधीर शर्मा, भारत सरकार के विधि विभाग के सचिव नीरज वर्मा, संयुक्त सचिव सुरेश कुमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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  • कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट



     एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शिमला जिले के कुपवी क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाया।
    मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
    इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य मन्नत तेगवान और हि.प्र. कांग्रेस कमेटी के महासचिव यशपाल तनाईक भी उपस्थित थे।
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  • मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया



    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज शिमला के पीटरहॉफ होटल में आयोजित नव निर्वाचित पंचायत प्रधान एवं उप-प्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
    मुख्यमंत्री ने प्रधानों एवं उप-प्रधानों को एंटी चिट्टा शपथ दिलाई तथा उनसे चिट्टा के खिलाफ अभियान में सक्रियता से सहभागिता सुनिश्चित करते हुए चिट्टा मुक्त पंचायत व समाज बनाने का आहवान् किया। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायत शासन व जनता के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी है और उन्हें पूर्ण आशा है कि वह विकास, जनसेवा और सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे। उन्होंने पंचायत प्रधानों से आग्रह किया कि वे समाज में खेल, शिक्षा, संस्कृति व सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे से दूर रखने में अपना योगदान दें।
    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समाज के हर वर्ग के कल्याण व समग्र विकास के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल व योजनाएं कार्यान्वित की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था, ग्रीन हिमाचल, शिक्षित हिमाचल, स्वस्थ हिमाचल, रोजगार, वित्तीय प्रबन्धन, नशा निवारण, कर्मचारी कल्याण सहित अन्य अनेक क्षेत्रों में दूरदर्शी सोच के साथ कार्य किया है।
    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जिला के नव-निर्वाचित पंचायत प्रधान और उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
    इस अवसर पर 7वें वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल, विधायक कुलदीप सिंह राठौर, मोहन लाल ब्राक्टा व हरीश जनारथा, महिला आयोग अध्यक्ष विद्या नेगी,  मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी व नवाचार) गोकुल बुटेल, अध्यक्ष हिमफेड महेश्वर सिंह चौहान, अध्यक्ष एपीएमसी देवानंद वर्मा, अध्यक्ष हिमकॉन विकेश चौहान, अध्यक्ष बाल आयोग अनीता ठाकुर, उपाध्यक्ष नशा निवारण बोर्ड संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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  • चिट्टा के खिलाफ लड़ाई जन आंदोलन में हुई परिवर्तित: मुख्यमंत्री
     
     
    मुख्यमंत्री ने शिमला क्रिकेट कार्निवल के समापन समारोह की अध्यक्षता की
     
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार देर सायं यहां पुलिस ग्राउंड भराड़ी में आयोजित शिमला क्रिकेट कार्निवल के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस क्रिकेट चैंपियनशिप का आयोजन ‘नशा छोड़ो, खेल खेलो’ थीम के अंतर्गत किया गया।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्निवल आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों, विशेषकर चिट्टा के विरुद्ध छेड़ी गई मुहिम अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से संचालित किए जा रहे हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के दौरान वॉलीबॉल और क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। खेल गतिविधियां युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती हैं तथा उन्हें नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 
    मुख्यमंत्री ने चिट्टा मुक्त समाज के निर्माण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सभी महाविद्यालयों में नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित सेमिनार और वॉकथॉन आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में नियमित रूप से जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुलिस, सामाजिक संगठन, पंचायतें, शिक्षक, अभिभावक और युवा मिलकर नशे के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क और जड़ों पर भी कड़ा प्रहार कर रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान लगभग 51 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियां जब्त कीं र्गइं हैं तथा कई तस्करों और माफिया तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे से संबंधित मामलों में अब तक 123 सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। 10 राज्य कर्मचारियों और 21 पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में नियुक्ति से पूर्व डोप टेस्ट अनिवार्य करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जो नशामुक्त हिमाचल के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
    उन्होंने प्रदेश में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और महत्वाकांक्षी पहलों की भी विस्तार से जानकारी दी।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को नशे के विरुद्ध शपथ भी दिलाई। 
    इस अवसर पर उन्होंने प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा क्रिकेट ग्राउंड शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की।
    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण, शिमला क्रिकेट कार्निवल क्लब के अध्यक्ष वीरेंद्र बांसटु, टूर्नामेंट अध्यक्ष मनोज चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप भी उपस्थित थे।
     
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  • राज्यपाल ने माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की
     
     
    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित थीं। 
    राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश तथा देशवासियों की शांति, समृद्धि, प्रगति एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। 
    उन्होंने देश में आपसी सद्भाव, एकता और निरंतर विकास की कामना करते हुए माता वैष्णो देवी से सभी नागरिकों के सुखद जीवन के लिए कामना की।
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